स्वछ-भारत

एक रोज सपने में मेरे,
मुझसा ही एक बच्चा आया,
पूछा उससे नाम जो मैंने,
उसने झट भारत बतलाया।

सुंदर छवि पर कपड़े मैले,
जैसे कब से नहीं नहाया।
पूछा मैंने हाल जो उसका
बोला सबने मुझे सताया।

कूड़ा डाला मेरे ऊपर,
मेरे बाग को काट गिराया,
मेरी प्यारी-प्यारी नदियों में,
जाने क्या-क्या दिया बहाया।

उस दिन मैंने देखा तुमको,
तुमने मुझको साफ कराया,
मेरे प्यारे-प्यारे भाई,
इसलिए सपने में आया।

तुम अपने जैसा ही सबको,
स्वच्छता का पाठ पढ़ाओ,
तन मन को तुम स्वच्छ रखो
और पर्यावरण भी स्वच्छ बनाओ।

मैंने उस नन्हें भारत को,
सपने में ही गले लगाया,
अपने सभी मित्रों सा मैंने,
उसे भी पक्का दोस्त बनाया।

अगले दिन अपने मित्रों को
मैंने अपना सपना बतलाया,
प्रण लिया स्वच्छ भारत का,
और दूसरों को दिलवाया।

तबसे मेरा प्यारा भारत,
जब भी सपने में आता है,
सुंदर कपड़े, स्वच्छ काया में
हँसता और इठलाता है।

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