महामारी और बंटी

बंटी से मुलाकात

#शिकायतवालीनेहल
#ShikayatWaliNehal

सभी को यथा योग्य अभिवादन!

अब आप सोचेंगे कि ये क्या नया मामला है? इस हैशटैग से पहले ही बहुत नकारात्मकता दिखती है, तो मैं आपको बता देती हूँ कि यह रचनात्मक नाम मैंने नहीं दिया है स्वयं को, बल्कि मेरे किसी भी अनुचित बात को सहन न कर पाने की तर्क शक्ति ने बचपन में ही मेरा ये नामकरण करवा दिया था। खैर यह जानना जरूरी नहीं अपितु जानना जरूरी यह है कि आज मेरी शिकायत क्या है? आज मेरी शिकायत है कि जब बंटी को पता है बंटी को स्वयं ही अपना ख्याल रखना है, क्योंकि बाबूजी दीदी से लड़ने में लगे हैं, मामा को घूमने से फुरसत नहीं, चाचा को भीड़ भाड़ संग डुबकी लगा कर पिकनिक मनना अच्छा लगता है, माता बीमार पड़ी है जिसके लिये एक ठो सिलिंडर का जुगाड़ नहीं हो पा रहा, मौसी-मौसा जी खेल कूद करा रहे, दद्दा-बउ पे काल मँडरा रहा है, बुआ अचानक गायब हो गई है, फूफा नाराज बैठे हैं, और पड़ोसी दरवाजे बंद कर मुँह छुपा कर बैठे हैं, तो वह अपना ख्याल क्यों नही रख पा रहा? अब बंटी को कैसे समझायें कि इस महामारी में बंटी के कई सगे संबंधी एवं दोस्त यार निपट सुलझ गए, और बंटी है कि न मारने की इच्छा लिए मरने को घूम रहा है। कृपया बंटी को समझाने में मेरी मदद करें एवं अपने सूझबूझ का परिचय दें।

(बंटी एवं कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है कृपया अन्यथा न लें)