ऊँट किस करवट बैठेगा।

बड़ी भारी समस्या हो गयी यह तो। हमारा पूरा खेल इस ऊँट पर टिका है और ये ऊँट है कि बैठने का नाम ही नहीं लेता।
पर बैठ क्यों नहीं रहा है यह ऊँट?
शायद इसे भी पता लग गया है कि जब तक यह खड़ा है इसकी आव-भगत है। इसके बैठते ही खेल समाप्त और उसके साथ इसकी आव- भगत भी।
तो अब करें क्या?
इंतजार के अलावा कर भी क्या सकते हैं। अब ऊँट कोई आदमी तो है नहीं कि कह दिया तशरीफ़ रखिये तो रख ली तशरीफ़। ऊँट का अपना मिज़ाज होता है। बैठना होगा तो बैठेगा नहीं तो नहीं बैठेगा।
तुम्हें याद है कि आखरी बार कब बैठा था यह ऊँट?
हाँ- हाँ क्यों नहीं, बिल्कुल याद है। अभी कुछ दिनों पहले ही बैठा था, मेरी किस्मत पर। फिर उठने का नाम नहीं ले रहा था। इस ऊँट को उठाने के लिए न जाने कितने अनुष्ठान कराए। फिर एक पंडित ने ऊंटनी के पैर में घुँघरू बाँधने की सलाह दी और कहा कि उसे लाल रंग की गोटे वाली चादर ओढ़ा कर इस ऊँट के सामने लेकर आऊँ तो यह उठ जाएगा। पूरे इक्यावन सौ लेकर यह नुस्खा बताया और यकीन मानो जैसे ही मैं उसे इसके सामने लेकर आया, ऊँट उठ गया।
तुम्हारी किस्मत का क्या हुआ?
वह थोड़ी दब गई। पंडित जी ने उसे उठाने के लिए ही लिए ही दोबारा ऊँट के बैठने का उपाय बताया है।
तो क्या तबसे ऊँट बैठा ही नहीं?
अरे! यही तो मुसीबत है कि यह सूरज ढलते ही बैठ जाता है और रात भर मजे से बैठा रहता है, और पौ फटते ही उठकर खड़ा हो जाता है और उसके बाद दिन भर नहीं बैठता। और पंडित जी के अनुसार इसके दिन में दाहिनी करवट पर बैठने से ही मेरी किस्मत दोबारा उठेगी।
मान लो कि यह कभी दिन में बैठा ही नहीं?
अरे ऐसे कैसे नहीं बैठेगा, पंडित जी अनुष्ठान कर रहे हैं इसके बैठने के लिए और मैं भी रात दिन इसकी सेवा में लगा हूँ कि यह शीघ्र ही बैठ जाये।
किन्तु यदि यह बैठा भी तो यह कैसे सुनिश्चित हो कि यह दाहिनी ओर ही बैठेगा?
उसका भी उपाय है। पंडित जी के अनुसार मुझे इसके पीछे ही रहना है जैसे ही यह बैठने को होगा मैं इसके बायीं ओर जाकर खड़ा हो जाऊंगा। इसे जगह नहीं मिलेगी और यह दाहिनी ओर बैठ जाएगा, और इसके बैठते ही मेरी किस्मत उठ जाएगी।

बड़े ही पहुँचे हुए पंडित मालूम होते हैं वे।
हाँ सो तो है।

तब तो सच में तुम्हारी किस्मत ऊँट के बैठते ही उठ जाएगी, करोगे क्या तुम उसके बाद। अरे भाई कुछ न करना पड़े इसलिए तो इतने अनुष्ठान कर ऊँट को बिठा रहा हूँ दाहिनी ओर, फिर सब किस्मत ही करेगी और में आराम से ऊँट पर बैठ कर मौज करूँगा।