माँ

तुम से इस धरा तक,
एक संस्कार आता है,
जो भर कर प्राण जीव में,
जीवित कर जाता है,

अवयक्त से करता व्यक्त,
वह चेतना जगाता है,
निराकार तुम्हारे रूप को,
साकार कर जाता है,

भर देता है वह प्रेम से,
ज्ञान को उपजता है,
जो शक्ति का पर्याय है,
वह भाव ‘माँ’ कहलाता है।