नया साल

विगत वर्षों की तरह,
यह वर्ष भी बीत गया मेरे भीतर,
जैसे बीती मैं इस बीते वर्ष में।
जिस भांति मैंने की कामना,
बीते वर्ष के प्रारंभ में,
पूरे वर्ष के शुभ की,
पूरे विश्व के शुभ की,
उसी तरह यह वर्ष भी करता होगा,
मेरे शुभ होने की कामना,
और अब अंत में हम एक दूसरे को देख मुस्कुराते हैं,
हम धीरे धीरे एक दूसरे में बीतते जाते हैं।

भोपाल गैस त्रासदी

उस एक रात
जहर घुला फ़िज़ा में,
रुक गयी जिंदगी,
हर रूप में,
बिछ गयीं लाशें,
कुछ ही पल में,
जो दब गयी,
दबा दी गयीं ज़मीन के नीचे
और मिट्टी डाल दी गयी,
उस बात पर,
उस रात पर,
एक सुबह ऊग आई है,
कुछ और नयी बातें ऊग आई है,
और उस मिट्टी पर खिल आई है नयी घाँस हरी,
लाशों से कुछ पेड़ निकले खड़े हैं,
कुछ उजले फूल भी दिख रहे,
जो कल फल होंगे,
नयी सुबह के,
गवाह होंगे नयी जिंदगी के।