माँ

तुमको सुनकर के खोई में, और तुम्हे देख कर जी पाई,
कभी लगा तुम्हें मैं समझ गयी, और कभी कुछ भी न समझ पाई,
मैं कैसे कह दूँ क्या हो तुम और दिल के कितने पास हो तुम,
मेरे जीवन के हर एक पल में माँ सबसे ज्यादा ख़ास हो तुम,

जब तुमने लाखों दर्द सहे, तब इस दुनिया में मैं आई,
और मुझे देखकर बाहों में उस दर्द में भी तुम हर्षाई,
जो अन्जाने में मैंने ली जीवन की पहली सांस हो तुम,
मेरे जीवन के हर एक पल में माँ सबसे ज्यादा ख़ास हो तुम,

मैंने हर पल सब लोगों को रोने की भाषा समझाई,
जब कहा किसी ने मुझसे कुछ कभी खुद, कभी उन पर झुंझलाई,
जो सीखा मैंने हँसते हुए वोह सबसे पहला अलफ़ाज़ हो तुम,
मेरे जीवन के हर एक पल में माँ सबसे ज्यादा ख़ास हो तुम,

जब भाषा का कोई ज्ञान न था, तब सारी बातें कह पाई,
जब भाव कोई न था मन में यब तुझे देखकर मुस्काई,
न समझी में भी समझ सकी वोह एक लौता एहसाह हो तुम,
मेरे जीवन के हर एक पल में माँ सबसे ज्यादा ख़ास हो तुम,

जब खुद को भी मैं भूल गयी तब भी तुमको न भुला पाई,
जीवन की हर एक मुश्किल में बस तू ही याद सदा आई,
मेरे दर्द की आहों की वोह सबसे पहली आस हो तुम,
मेरे जीवन के हर एक पल में माँ सबसे ज्यादा ख़ास हो तुम,

जब सीखा जीवन में चलना तो, कई बार गिरी ठोकर खायी,
कभी खुद से ही मैं संभल गयी कभी गिरी रोई चोटें खायी,
जो टूट सका न एक पल भी एसा मेरा विश्वास हो तुम,
मेरे जीवन के हर एक पल में माँ सबसे ज्यादा ख़ास हो तुम,

7 thoughts on “माँ

  1. The first line of your poem celebrates, above all, what a mother really is – a marvelous storyteller. The mythologies are on the tip of their tongues, and a conversation with them never goes without an amusing anecdote.

    A wonderful poem by a wonderful mother!

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  2. Marvelous poem !!

    Your poems completely justifies the name of your blog. Everybody can write poems but very few people know how to ‘weave’ it, you certainly belong to those few.

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  3. फिर एक बार …..माँ …खास , विश्वास , एहसास , सांस, आस सब कुछ इतना सुन्दर लिखा है तुमने. राकेश सोने से पहले कह रहे हैं बहुत सुन्दर कवीता सुनायी …..दिन सफल हो गया …फिर तो तुम्हें भी तोहफा मिल गया …संवेदना , ममता , से भरपूर इस कविता में भावना ही नहीं पूरी दुनिया यानी माँ समाई है ! तुम्हारी कविता को तुम्हारे अंदाज़ में पढना भी सीख लिया है मैंने ..

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    1. dear mam you are so expressive that you can make any poetry beautuful with ypur art of recitation. thanks for reciting it to sir and adding more meaning to my writings and thanks to sir for such a wonderful appreciation

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  4. म।ँ ….. कितन। सरल शब्द, पर सुनते ही मन को सुकून सा मिल जाता है, और यह कवित। बस कुछ ही पंक्तियों में पूरे जीवन को समेट रही है़़़़़…..
    Greatly written …..

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