मेज़

इस भाव न्यून दुनिया में,
भाव ढोना मुश्किल है,
दिमाग़ संकीर्ण है,
हर सोच ओछी है,
भारी है मन आज,
जीवन एक बोझ है,
बोझ है,
कड़वा है,
कड़वा हर सच की तरह,
और सच कितना अजीब,
पुरषों कि दुनिया मैं औरत निर्जीव,
सामान है,
उपयोग का,
उपभोग का,
और सामान भी कैसा?
जो बहुत ज़रूरी,
उपयोगिता तो सिद्ध है,
शायद कमरे में रखी मेज़ कि तरह,
जो ना हो तो लाखों सामान आएं ज़मीन पर,
सजती है कमरों के कोनो में,
या फिर कभी बीच में,
कोई आये तो पुछती है कभी,
पर उपयोग रोज़ होती है,
धूल भी खाती है,
खाख से मिलती है,
और कितना भी सामान हो,
रखने को तैयार,
अपने सिर पर,
या कमर पर,
पता नही!
क्या मेज़ों कि कमर भी होती है?
पता नहीं!
क्या मेज़ भी कभी रोती है?
या फिर खुश भी कभी होती है?
और एक बात!
मेज़ कि संख्या भी ज़रुरत अनुसार होती है,
बड़ा कमरा है तो मेज़ भी दो,
एक सामान रखने और एक सजाने को,
छोटा हो या बड़ा,
नयी या पुरानी,
सब चलने दो,
और ज़रुरत हो तो एक और आने दो,
और दफ्तरों में तो कई मेज़ होती हैं,
और अपने ऊपर कई फाइलें ढोती है,
अपने कमरे कि ख़राब तो दूसरे कि बुलवा लो,
पर मेज़ तो ज़रूरी है,
कई फाइलें ढोने,
कई और फाइलें ढोने को,
और फाइलों का भी मेज़ से बड़ा अजीब नाता है,
फाइल तभी आगे बढ़ती है,जब मेज़ के नीचे से कुछ आता है,
छी ये कैसा घिनोना खेल,
इस पुरुष प्रधान दुनिया में औरत का क्या मेल?
मेल न तो तन से,
मेल नहीं मन से,
और मेल कैसा एक जीव का निर्जीव से,
जीव भी कैसा जो चालक और तेज़ है,
और औरत का अस्तित्व तो बस एक मेज़ है।

11 thoughts on “मेज़

  1. Prejudices are a part of our lives. But some of them veer off towards hypocrisy, insanity and paranoia. The mentality you poignantly portrayed is one such prejudice, and it has nothing in itself to make its bearer proud. Well done..

    Like

  2. Lovely poetry nehal. You can inspire others to be creative too! The height and flight of your imagination can definitely bring a change in the society. Keep posting …waiting for the next one!

    Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s